समर्थकों को साधने का माध्यम बन गई विधायक निधि

समर्थकों को साधने का माध्यम बन गई विधायक निधि

ऋषिकेश। समर्थकों को साधने का माध्यम बनीं विधायक निधि में प्रदेश सरकार ने एक करोड़ रूपये सालाना का ईजाफा कर दिया है। इस संबंध में आम हुई शिकायतों पर भी सरकार ने गौर करने की जरूरत महसूस नहीं की।

देश में राजनीतिक पदनाम की निधि के खर्च करने के तौर तरीकों पर सवाल खड़े होते रहे हैं। इसमें सांसद/विधायक निधि प्रमुख रूप् से शामिल हैं। बहुमत कम ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिनके द्वारा निधि का मानकानुसार व्यय किया जाता है।

अधिसंख्य जनप्रतिनिधि इस निधि का उपयोग समर्थकों को साधने के लिए करते हैं। इस निधि से बहुत कम ऐसे काम होते हैं जो व्यापक जनहित वाले हों। निधि से विकास कार्यों की डयूप्लीकेसी तक की शिकायतें हैं।

विधायक निधि के कार्यों में गुणवत्ता कोई मानक नहीं नहीं होता। बड़े जनप्रतिनिधियों से जुड़ा मामला होने की वजह से इसकी गुणवत्ता पर सवाल उठाने का साहस सरकारी एजेंसियां भी नहीं कर पाती हैं।

उत्तराखंड के कुछ विधायकों पर तो निधि में घालमेल करने के आरोप आम हैं। ऐसे में विधायक निधि में एक करोड़ा रूपये सालाना का ईजाफा किसी के गले नहीं उतर रहा है। अब प्रत्येक विधायक पौने चार करोड़ रूपये सालाना मिलेंगे। यानि समर्थक को साधे रखने में विधायक जी को किसी प्रकार की कोई परेशानी नहीं होगी।

इस निधि की वजह से जनप्रतिनिधियों की विधायी कार्यों में रूचि बेहद कम हो गई है। सदन में सवाल, विधेयकों पर चर्चा में विधायकों की शिरकत इस बात का प्रमाण है।

 

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