योग से आत्मशुद्धि एवं कर्म से पर्यावरण शुद्धि का संकल्प

योग से आत्मशुद्धि एवं कर्म से पर्यावरण शुद्धि का संकल्प

parपरमार्थ निकेतन आश्रम में दो सप्ताह से संचालित योग कोर्स का आज समापन हुआ। इस मौके पर योग द्वारा आत्मशुद्धि और कर्म द्वारा पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लिया गया।

विभिन्न देशों को योग जिज्ञासुओं ने योगए ध्यानए आयुर्वेदए प्राणायाम एवं भारतीय संस्कृति व आध्यात्म पर होने वाले सत्संग का लाभ लिया। साध्वी आभा सरस्वती जी एवं योगाचार्य डॉ इन्दू शर्मा के निर्देशन में योग का प्रशिक्षण दिया।

समापन के अवसर पर परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती एवं साध्वी भगवती जी ने प्रतिभागियों को योग प्रशिक्षण प्रमाणपत्र दिये।
इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने सभी प्रतिभागियों को मनुष्य जीवन और पर्यावरण के मध्य संबंधों के विषय में जानकारी देते हुये पर्यावरण संरक्षण का संकल्प कराया।

उन्होने कहा कि डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के आधार पर प्रतिवर्ष दुनिया भर में पांच वर्ष से कम उम्र के लगभग 17 लाख बच्चों की मौत वायु प्रदूषण, दूषित जल, अपर्याप्त स्वच्छता एवं पर्यावरणीय कारणों से अर्थात चारों ओर बढ़ते प्रदूषण को कारण हो जाती है।

अगर हम सभी मिलकर वृक्षारोपण करे तो वायुप्रदूषण में कमी लायी जा सकती है साथ ही अभावग्रस्त परिवारों को स्वच्छ जल एवं शौचालय उपलब्ध कराकर इन मौत के आकंडों को कम कर सकते हैं।

उन्होने प्रतिभागियों से कहा कि योग आन्तिरीक शुद्धि करता है और आप सभी अपने.अपने देश जाकर बाहरी शुद्धि पर भी कार्य करें तभी हम अपनी पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त मुक्त रख सकते हैं। विश्व के सभी लोगो को स्वच्छ जल की उपलब्धता हो इसी भाव से स्वामी  साध्वी भगवती सरस्वती जी एवं योग प्रतिभागियों ने मिलकर विश्व ग्लोब का जलाभिषेक किया साथ ही सभी ने हाथ उठाकर संकल्प लिया कि हम अपने जल के स्रोतों को स्वच्छ रखने के लिये मिलकर कार्य करेंगे।

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